अमेरिका के लिए खतरा: क्या ईरान किम जोंग उन के हथियारों का इस्तेमाल करेगा?
उत्तर कोरिया के किम जोंग उन के जिस परमाणु हथियार से अमेरिका डरता है, अब वही खतरा ईरान के कदमों से बढ़ता दिख रहा है. ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चिंता बन चुका है, खासकर अमेरिका के लिए. हाल ही में जारी रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने यूरेनियम के भंडार को तेजी से बढ़ाया है, जिससे वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. अमेरिका में ट्रंप की जीत के बाद से, ईरान के यूरेनियम भंडार में वृद्धि एक बड़ा खतरा साबित हो रही है. दिसंबर 2024 में, ईरान ने यूरेनियम समृद्धि को तेज़ी से बढ़ाने का ऐलान किया था और तब से वह इस दिशा में लगातार काम कर रहा है. हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान ने 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का भंडार बढ़ा लिया है. इस स्तर का यूरेनियम अब केवल परमाणु हथियार बनाने में ही काम आ सकता है, जबकि ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांति के लिए है.
60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम के खतरे
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास पिछले कुछ महीनों में 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम का भंडार बढ़कर 274.8 किलोग्राम तक पहुंच चुका है. अगर इसे और समृद्ध किया जाए, तो यह छह परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है. इस स्थिति में दुनिया को ईरान की परमाणु योजनाओं को लेकर सतर्क रहना जरूरी है. यूरेनियम एक प्राकृतिक तत्व है, जो ज़्यादातर धरती पर पाया जाता है. हालांकि, इसे जब तक शुद्ध या समृद्ध नहीं किया जाता, तब तक यह परमाणु ऊर्जा के लिए इस्तेमाल नहीं होता। समृद्धि का मतलब है, यूरेनियम के सबसे सक्रिय आइसोटोप, U-235 की मात्रा को बढ़ाना, और यह काम किया जाता है सेंट्रीफ्यूज नामक मशीनों के जरिए, जो बेहद तेज़ गति से घूमती हैं. जब यूरेनियम 90% या उससे ज्यादा समृद्ध हो जाता है, तो इसे वॉरहेड्स (हथियारों) के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसे वॉरहेड्स-ग्रेड यूरेनियम कहा जाता है.
अमेरिका की दबाव नीति और ईरान का विरोध
ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी अधिकतम दबाव नीति जारी रखेगा, तब तक वह अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं करेगा. ईरान के विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के बीच परमाणु मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता. इसके बजाय, ईरान रूस और चीन के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है.
ट्रंप की “अधिकतम दबाव” नीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में अमेरिका को ज्वाइंट कंप्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर कर दिया था, जिससे ईरान पर परमाणु प्रतिबंध लगाए गए थे. ट्रंप का यह कदम न केवल वैश्विक राजनीति में तूफान लाया, बल्कि ईरान ने इन प्रतिबंधों को तोड़ते हुए अपनी परमाणु गतिविधियों को बढ़ा दिया. अब, ट्रंप अपनी “अधिकतम दबाव” रणनीति को फिर से लागू करते हुए ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक लाने का लक्ष्य बना रहे हैं. ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो परमाणु हथियार बनाने के लिए इन गतिविधियों में लिप्त है. अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इससे पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलने का खतरा बढ़ जाएगा.
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