मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की परीक्षा; क्या थमेगा मिडिल ईस्ट का महायुद्ध?
इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गया है। पहले दौर की विफलता के बाद अब दूसरे चरण की वार्ता शुरू हो रही है। व्हाइट हाउस के अनुसार, सोमवार को एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचेगा, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने फिलहाल अमेरिकी प्रस्तावों को ठुकराते हुए वार्ता से दूरी बना ली है।
शहबाज-पेजेश्कियान संवाद:
शांति प्रयासों के बीच पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर चर्चा की। शरीफ ने उन्हें सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के साथ हुई हालिया बातचीत का ब्योरा दिया। उधर, ईरान ने अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और विरोधाभासी बयानों को वार्ता में शामिल न होने का मुख्य कारण बताया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अमेरिकी सैन्य विमान C-17 ग्लोबमास्टर III के रावलपिंडी उतरने के बाद रेड जोन की सड़कें बंद कर दी गई हैं। सेरेना और मैरियट जैसे प्रमुख होटलों को खाली कराकर नई बुकिंग पर रोक लगा दी गई है। अब सबकी नजरें पाकिस्तान की मध्यस्थता पर टिकी हैं कि क्या वह ईरान को बातचीत की मेज पर वापस ला पाएगा।
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