छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान; भोरमदेव अभयारण्य में 27 अप्रैल से शुरू होगी जंगल सफारी।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन का नया अध्याय: भोरमदेव अभयारण्य में शुरू होगी रोमांचक 'जंगल सफारी'
रायपुर| छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक नया और रोमांचकारी अध्याय जुड़ने जा रहा है। अपनी ऐतिहासिक महत्ता और आस्था के लिए प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के आसपास के घने जंगलों में अब पर्यटक वन्यजीवों के करीब जा सकेंगे। भोरमदेव अभयारण्य में शीघ्र ही जंगल सफारी का शुभारंभ होने जा रहा है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगा।
35 किमी लंबा सफारी रूट और 22 बार नदी पार करने का थ्रिल लगभग 352 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में 35 किलोमीटर लंबा सफारी मार्ग तैयार किया गया है। इस सफर की सबसे अनूठी बात यह है कि पर्यटकों को सफारी के दौरान एक संकरी नदी को लगभग 22 बार पार करना होगा। साथ ही, रास्ते में पड़ने वाले मनोरम झरने इस यात्रा को और भी रोमांचक बनाएंगे।
वन्यजीवों का दीदार और खास सुविधाएं
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विविध वन्यजीव: घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, हाथी, नीलगाय, सांभर और राजकीय पशु वन भैंसा जैसे वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलेगा।
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सफारी वाहन: शुरुआत में 3 विशेष वाहन तैनात किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक वाहन में 6 पर्यटक, एक चालक और एक गाइड मौजूद रहेंगे।
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सुविधाएं: पर्यटकों के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही करियाआमा गेट पर पार्किंग, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
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कैंपिंग का आनंद: सफारी के अलावा, यहां जंगल के बीच रात बिताने के लिए कैंपिंग की सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
27-28 अप्रैल को होगा भव्य शुभारंभ इस सफारी का औपचारिक उद्घाटन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में 27-28 अप्रैल को प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया जाएगा। इस पहल से न केवल इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
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