नई दिल्ली |प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की अपनी ताज़ा रिपोर्ट जारी कर दी है। इस वर्ष एजेंसी की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ 'सख्त एक्शन' के बजाय 'रिकवरी और साक्ष्य-आधारित जांच' पर अधिक जोर दिया गया है।

छापेमारी के टूटे सभी रिकॉर्ड

बीता साल ED के इतिहास में सबसे सक्रिय वर्ष रहा। एजेंसी ने देशभर में कुल 2,892 छापेमारी की कार्रवाई की। यह पिछले वर्ष (1,491 छापे) की तुलना में लगभग दोगुनी (94% की वृद्धि) है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • संपत्ति कुर्की (Asset Attachment): ED ने 712 प्रोविजनल ऑर्डर जारी कर 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। पिछले साल (30,036 करोड़ रुपये) के मुकाबले इसमें 171% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • निवेशकों को बड़ी राहत: इस वर्ष एजेंसी ने धोखाधड़ी के पीड़ितों, होमबॉयर्स और बैंकों को 32,678 करोड़ रुपये वापस दिलाए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 114% अधिक है।

गिरफ्तारियों में क्यों आई कमी?

जहाँ एक तरफ छापेमारी और कुर्की बढ़ी है, वहीं गिरफ्तारियों के आंकड़ों में गिरावट देखी गई है:

  1. इस साल कुल 156 गिरफ्तारियां हुईं, जो पिछले साल (214) की तुलना में 27% कम हैं।

  2. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अब वह "टारगेटेड और एविडेंस-बेस्ड" (साक्ष्य आधारित) जांच पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि कानूनी प्रक्रिया अधिक ठोस हो सके।