शेयर बाजार हरा, लेकिन रुपये पर दबाव—सेंसेक्स 358 अंक ऊपर
नई दिल्ली। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। पश्चिम एशिया से आए सकारात्मक कूटनीतिक संकेतों ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ा दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों ने लंबी छलांग लगाई। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी ने थोड़ी चिंता भी पैदा की है।
शुरुआती बढ़त और सूचकांकों का हाल
ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के कारण घरेलू बाजार में जोरदार खरीदारी रही:
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सेंसेक्स और निफ्टी: कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स 358 अंक चढ़कर 77,245 के करीब पहुंच गया, जो बाद में 500 अंकों की तेजी के साथ 77,413 के स्तर को छू गया। वहीं, निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक की बढ़त लेकर 24,150 के पार निकल गया।
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मिडकैप व स्मॉलकैप: छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों में भी तेजी का रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में 0.6 से 0.7 प्रतिशत का सुधार देखा गया।
दिग्गज कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन
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बढ़त वाले शेयर: बेहतर तिमाही परिणामों के कारण जोमैटो और उसकी पैरेंट कंपनी 'इटरनल' के शेयरों में 4% की उछाल रही। इसके साथ ही मारुति सुजुकी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी पोर्ट्स और इन्फोसिस के शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
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गिरावट वाले शेयर: एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसी कंपनियों के शेयरों में हल्का दबाव महसूस किया गया।
तेजी के पीछे का मुख्य कारण
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां रोकने के प्रस्ताव की खबर ने बाजार में संजीवनी का काम किया है। पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संबंधी दावों और कूटनीतिक हलचलों ने भी बाजार को गति दी है।
चुनौतियां: कच्चा तेल और कमजोर रुपया
बाजार की बढ़त के बीच कुछ मोर्चों पर चुनौतियां बरकरार हैं:
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कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड ऑयल 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल का ऊंचे स्तर पर रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति (महंगाई) का खतरा बढ़ा सकता है।
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विदेशी निवेशक (FII): विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने बाजार से 2,104 करोड़ रुपये की पूंजी निकाली।
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रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 11 पैसे गिरकर 94.79 के स्तर पर पहुंच गई है। आयातकों की ओर से डॉलर की भारी मांग को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
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