युद्ध का असर भारत तक: तारकोल महंगा, सड़क परियोजनाएं अटकीं
लखनऊ: वैश्विक राजनीति और खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दिखने लगा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति शृंखला को बाधित कर दिया है, जिसका सीधा प्रहार तारकोल (बिटुमेन) की कीमतों पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश में महज डेढ़ महीने के भीतर तारकोल के दाम 60 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं, जिससे राज्यभर में सड़क निर्माण की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।
आसमान छूती कीमतें: एक नजर आंकड़ों पर
पेट्रोलियम उत्पाद होने के कारण कच्चे तेल की महंगाई ने तारकोल के गणित को बिगाड़ दिया है। VG-30 ग्रेड के तारकोल की कीमतों में हुई वृद्धि इस प्रकार है:

बढ़ती लागत का निर्माण पर असर
सड़क निर्माण की दो मुख्य प्रक्रियाओं—BC (बिटुमिनस कंक्रीट) और PC (प्रिमिक्स कार्पेट) की प्रति किलोमीटर लागत में भारी इजाफा हुआ है:
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BC कार्य (7 मीटर चौड़ाई): इसकी लागत 33.48 लाख रुपए से बढ़कर 45.39 लाख रुपए प्रति किमी हो गई है।
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PC कार्य (3.75 मीटर चौड़ाई): विशेष मरम्मत के लिए उपयोग होने वाले इस कार्य की लागत 11.90 लाख से उछलकर 15.35 लाख रुपए प्रति किमी पहुँच गई है।
ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट
लोक निर्माण विभाग (PWD) के पुराने रेट पर टेंडर लेने वाले ठेकेदार अब गहरे संकट में हैं। लागत में अचानक हुई इस वृद्धि के कारण कई प्रोजेक्ट्स में 'नो लॉस-नो प्रॉफिट' की स्थिति भी खत्म हो गई है।
विशेषज्ञों का मत: तारकोल वह गोंद है जो रोड़ी और बजरी को सड़क पर थामे रखता है। इसके बिना निर्माण संभव नहीं है। ठेकेदारों ने केंद्र और राज्य सरकार से राहत पैकेज या दरों के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है।
क्या होगा आगे?
PWD अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि बजट की कमी और बढ़ती लागत के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो प्रदेश की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का काम ठप हो सकता है, जिससे जनता को जर्जर सड़कों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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