घर बैठे भरें जानकारी: एमपी में शुरू हुआ स्वगणना अभियान
भोपाल। देश में जनगणना की तैयारियों के तहत 16 अप्रैल यानी आज से स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो रही है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी. इसके बाद 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाएंगे. इस पहल की शुरुआत जनगणना आयुक्त के निर्देश पर की जा रही है, जिसमें राज्य के प्रमुख जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी संभव है.
ऑनलाइन पोर्टल से खुद भर सकेंगे जानकारी
स्वगणना के दौरान नागरिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे. इसके लिए https://se.census.gov.in पोर्टल उपलब्ध कराया गया है, जो रोज सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक सक्रिय रहेगा. इस प्रक्रिया में लगभग 15 से 20 मिनट का समय लगेगा और 33 सवालों के जवाब देने होंगे.
1 मई से होगा घर-घर सत्यापन
30 अप्रैल तक ऑनलाइन डेटा भरने के बाद 1 मई से प्रगणक घर-घर पहुंचकर जानकारी का सत्यापन करेंगे. जिन लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरा होगा, उनकी जानकारी प्रगणक खुद एकत्र कर सॉफ्टवेयर में अपलोड करेंगे.
डिजिटल मैप पर लोकेशन करना होगा दर्ज
ऑनलाइन प्रक्रिया में अपने घर की सटीक लोकेशन डिजिटल मैप पर मार्क करनी होगी. इसके लिए पिनकोड डालना जरूरी होगा. मैप खुलने के बाद लाल मार्कर को खींचकर अपने घर की स्थिति तय करनी होगी, जिससे प्रगणक को सही स्थान की पहचान मिल सके.
रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी जानकारी
स्वगणना के लिए परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा. एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही परिवार का पंजीकरण किया जा सकेगा. ओटीपी के जरिए सत्यापन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और एक बार दर्ज नाम व भाषा को बदला नहीं जा सकेगा.
33 सवालों में घर और परिवार की पूरी जानकारी
प्रश्नावली में मकान और परिवार से जुड़े 33 सवाल शामिल होंगे. इसमें दीवार, छत, फर्श, पानी, बिजली, शौचालय, गैस जैसी सुविधाओं के साथ टीवी, मोबाइल, वाहन और अनाज से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी.
सबमिट के बाद मिलेगी 11 अंकों की आईडी
सभी जानकारी भरने के बाद प्रीव्यू फाइल तैयार होगी, जिसे जांचकर सबमिट करना होगा. इसके बाद 11 अंकों की सेल्फ एनुमरेशन आईडी जारी की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी होगा. यह आईडी एसएमएस और ईमेल के माध्यम से भी प्राप्त होगी.
बाद में सुधार का विकल्प रहेगा सीमित
एक बार जानकारी सबमिट करने के बाद उसमें खुद से बदलाव नहीं किया जा सकेगा. हालांकि, प्रगणक के घर आने पर जरूरत होने पर सुधार कराया जा सकता है. सत्यापन के समय नागरिकों को अपनी आईडी दिखानी होगी, जिससे डेटा का मिलान किया जाएगा.
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