पितरों की शांति के लिए खास दिन: वैशाख अमावस्या पर अपनाएं ये सरल उपाय
देवघर. सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. हर महीने आने वाली यह तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत प्रभावशाली मानी जाती है. इस दिन गंगा समेत सभी पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष विधान है. मान्यता है कि अमावस्या के दिन पवित्र स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान कर धार्मिक कार्यों में लग जाते हैं.
कब है वैशाख अमावस्या
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि ऋषिकेश पंचांग के अनुसार वैशाख माह की अमावस्या इस साल 17 अप्रैल को पड़ रही है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन किया गया दान और पूजा कई गुना फल देता है.
अमावस्या में करें पितरों को प्रसन्न
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है. गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. यही कारण है कि इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनके लिए विशेष पूजा और तर्पण करते हैं.
पितृ दोष के क्या हैं लक्षण
यदि किसी की कुंडली में राहु दोष या पितृ दोष होता है, तो व्यक्ति का मन हमेशा अशांत रहता है. घर में बिना कारण कलह होता रहता है और परिवार के सदस्य अक्सर बीमार रहते हैं. ऐसे संकेत मिलने पर समझ लेना चाहिए कि पितृ दोष का प्रभाव है, जिसे दूर करना जरूरी होता है.
पितृ दोष की मुक्ति के लिए करें यह खास उपाय
पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन कुछ विशेष उपाय करने चाहिए. इस दिन अपने पितरों के नाम से तर्पण करें, पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें. ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, पितृ दोष शांत होता है और राहु ग्रह का प्रभाव भी कम हो जाता है. इन उपायों को श्रद्धा और सच्चे मन से करने पर जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने लगती है.
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