अनजाने में हुए पापों से चाहिए मुक्ति? वरुथिनी एकादशी पर करें ये व्रत
हिंदू पंचांग के हिसाब से एक संवत में कुल 12 मास होते हैं और एक मास में दो एकादशी तिथियां पड़ती हैं. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित सबसे खास दिन है. एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना, आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं. संवत 2083 19 मार्च से चैत्र शुक्ल पक्ष से शुरू हो चुका है. चैत्र के बाद वैशाख मास का आगमन होगा, जिसमें संवत की दूसरी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की होती है. इसका पुराणों में भी वर्णन है. लोकल 18 से हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संवत में कुल 24 एकादशियों का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है.
स्वर्ण दान जितना फल
संवत की दूसरी एकादशी वैशाख कृष्ण पक्ष में आती है जो वरुथिनी एकादशी के नाम से विख्यात है. साल 2026 में यह एकादशी 12 अप्रैल रविवार को होगी. एकादशी तिथि का यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, एकादशी का व्रत विधि विधान आदि किया जाता है. भविष्य पुराण के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत विधि विधान से करने पर स्वर्ण दान करने के बराबर का फल मिलता है.
12 अप्रैल को ही क्यों
इस एकादशी का व्रत सभी एकादशी में विशेष इसलिए भी होता है क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प किया जाता है और पूरे दिन इस व्रत का नियम अनुसार पालन किया जाए तो कन्यादान और 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर का फल मिलना पक्का हो जाता है. पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि इस व्रत को विधि पूर्वक करने से जाने अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं और पूर्व जन्म के पापों से भी छुटकारा मिलने की मान्यता धार्मिक ग्रंथों में है. ज्योतिषी गणना के अनुसार 12 अप्रैल की तड़के 1:16 तक दशमी तिथि होगी जबकि 1:17 से एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी. हिंदू पर्वों का संपूर्ण फल उसकी उदया तिथि में मिलता है, इसलिए वरुथिनी एकादशी का व्रत 12 अप्रैल को किया जाएगा.
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