जोधपुर में गणगौर का रंग चरम पर, 21 को उद्यापन, सोलह श्रृंगार में सजी तीजणियों का अनोखा उत्साह
अखंड सुहाग की कामना के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख गणगौर पूजन पर्व इन दिनों सूर्यनगरी में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. होली के दूसरे दिन से शुरू हुआ यह पारंपरिक उत्सव 21 मार्च को गणगौरी तीज के दिन उद्यापन के साथ संपन्न होगा. पूजन के समापन पर होने वाले उद्यापन को लेकर नवविवाहित तीजणियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. गणगौर पर्व के तहत आयोजित कार्यक्रमों ने शहर की सांस्कृतिक रंगत और परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया है.
महिलाएं प्रतिदिन पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर गणगौर माता की विधिवत पूजा-अर्चना कर रही हैं. लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियां पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही हैं. इसी कड़ी में जोधपुर की जालम निवास गणगौर समिति पिछले 20 वर्षों से इस आयोजन का लगातार संचालन कर रही है और इस बार भी इसकी खास झलक देखने को मिल रही है. गवर-ईसर जी का प्रतिदिन अलग-अलग आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है.
सजावट, गीत और सहभागिता से बढ़ा आकर्षण
साथ ही हर दिन नई-नई थीम और गतिविधियों के जरिए आयोजन को और जीवंत बनाया जा रहा है. बदलते परिवेश के अनुरूप सजावट और प्रस्तुतियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं. खासकर महिलाओं में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है और वे बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं. महिलाएं, युवतियां और बालिकाएं मंगला-गणगौर के पारंपरिक गीत गाते हुए सामूहिक महिला-संगीत में शामिल हो रही हैं. ईसर-गवार गणगौर पूजन के दौरान विवाहित महिलाओं ने सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की, वहीं युवतियों ने सुयोग्य वर पाने की प्रार्थना की.
20 साल से परंपरा निभा रहीं तीजणियां
जालम विलास की तीजणियों में इस बार भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. परमेश्वरी, खुशबु, विनिता, प्रीति, शकुन्तला, रेखा, दुर्गा, स्वेता, नेहा, रीतु और ममता सहित कई महिलाएं पिछले 20 वर्षों से गणगौर माता की पूजा करती आ रही हैं. हर वर्ष ये तीजणियां श्रद्धा और परंपरा के साथ ईसर-गवार जी की पूजा-अर्चना करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम भी कर रही हैं.
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