डेलॉय के अध्ययन में सामने आई MSME सेक्टर की मुश्किलें, सीमित क्रेडिट एक्सेस से घट रही ग्रोथ
व्यापार: भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) औपचारिक ऋण तक सीमित पहुंच जैसी कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इससे इन उद्योगों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। हालांकि, उनकी डिजिटल तैयारी एक उज्ज्वल बिंदु है। डेलॉय इंडिया की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) समकक्षों की तुलना में डिजिटल तत्परता के उच्च स्तर का प्रदर्शन करने के बावजूद भारतीय एमएसएमई बड़े उद्यमों की उत्पादकता के सिर्फ 18 फीसदी पर काम करते हैं।
वैश्विक समकक्षों की तुलना
ओईसीडी अर्थव्यवस्थाओं में यह 45-70 फीसदी है। यह अंतर वैश्विक समकक्षों की तुलना में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को सीमित करता है। डेलॉय इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, जीडीपी में करीब 30 फीसदी का योगदान करने वाला भारत का एमएसएमई क्षेत्र पुरानी प्रौद्योगिकी, नियामकीय जटिलताएं और बुनियादी ढांचे की समस्याओं से भी जूझ रहा है।
डेलॉय एमएसएमई चुनौती सूचकांक
डेलॉय के एमएसएमई चुनौती सूचकांक के अनुसार, सिले परिधान जैसे क्षेत्रों में एमएसएमई को ऋण संबंधी गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि जोखिम बहुत अधिक हैं। इनमें कम मुनाफा और तीव्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल है, जिससे उनके उत्पादों की प्रतिस्थापना कठिन हो जाती है। एमएसएमई क्षेत्र का निर्यात में 45 फीसदी योगदान है। यह 24 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
हीटवेव का असर गहरा, MP में रात का अलर्ट; मजदूर दोपहर में नहीं करेंगे काम
मोहन यादव ने नमक्कल और अविनाशी में किया रोड शो, NDA के लिए मांगे वोट
अन्नाद्रमुक गठबंधन को लेकर गरजे खरगे, PM मोदी पर लगाया गंभीर आरोप
केदारनाथ धाम में अनुशासन सख्त, मोबाइल उपयोग पूरी तरह बंद
जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश
यात्रियों को झटका, कुछ ट्रेनें रद्द तो कुछ का बदला शेड्यूल
नियमों को ठेंगा दिखाकर निजी कंपनी का प्रमोशन, सरगुजा के दो स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस